धान उपार्जन केंद्र हीरापुर कौड़ियां में कलेक्टर से नहीं डरते प्रभारी, किसानों से ले रहे 41.500 तक की तौल, बिना कमीशन दिए नहीं की जा रही तौल, नोडल अधिकारी नदारत, बैनर में नाम तक गायब !!

40.600 किलो के स्थान पर 41.200 से 41.500 किलो तौल, रिजेक्ट धान की खुलेआम भर्ती — जिम्मेदारों की जानकारी भी गायब ।


कटनी जंक्शन - जिले के धान उपार्जन केंद्र हीरापुर कौड़ियां (मां नर्मदा वेयर हाउस) में धान खरीदी को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। केंद्र पर किसानों से निर्धारित 40 किलो 600 ग्राम की जगह अलग-अलग किसानों से 41.200 से 41.500 किलो प्रति बोरी के हिसाब से तौल की जा रही है, जिससे सीधे-सादे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्थानीय किसानों का आरोप है कि केंद्र प्रभारी सुरेंद्र दाहिया की निगरानी में यह अतिरिक्त तौल लंबे समय से की जा रही है। प्रति बोरी लगभग 600-1000 ग्राम अतिरिक्त तौल से हजारों बोरियों में भारी मात्रा में धान का हेरफेर होने की आशंका जताई जा रही है।

सर्वेयर कर रहे खरीदी प्रभारी के दबाव में कार्य रिजेक्ट धान के ढेर,फिर भी खरीदी जारी

हीरापुर कौड़िया खरीदी केंद्र परिसर में नियुक्त किए गए सर्वेयरों के द्वारा रिजेक्ट धान के बड़े-बड़े ढेर खुलेआम दिखाई दे रहे हैं, लेकिन मौके पर खरीदी प्रभारी सुरेंद्र दाहिया ने किसानों को दाएं-बाएं किया ताकि नियुक्त सर्वेयर के द्वारा मौके पर पंचनामा बनाने की कार्यवाही प्रभावित हो सके,, खरीदी प्रभारी सुरेंद्र दहिया के दबाव में कार्य कर रहे सर्वेयर इसके बावजूद मनमाने ढंग से खरीदी जारी है। इससे धान की गुणवत्ता और शासन की खरीदी और नीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, ऐसे धान की खरीदी से सरकारी गोदामों में अमानक स्टॉक पहुंचने का खतरा है।

खरीदी केंद्र प्रभारी सुरेंद्र दाहिया के हौसले इतने बुलंद कि केंद्र में लगे बैनर से जिम्मेदारों के नंबर एवं नाम गायब


हैरानी की बात यह है कि केंद्र कार्यालय के गेट पर लगाए गए सूचना बैनर में केंद्र प्रभारी और नोडल अधिकारी के मोबाइल नंबर जानबूझकर नहीं लिखे गए हैं। यह नियमों का सीधा उल्लंघन है और पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। सूत्रों का कहना है कि शिकायतों से बचने के लिए नियुक्त किए गए नोडल अधिकारी का संपर्क और उनके नाम की जानकारी छिपाई गई है। जिससे किसान निरंतर परेशान होता रहे।

प्रशासन की चुप्पी

इतनी स्पष्ट गड़बड़ियों के बावजूद प्रशासनिक निगरानी कमजोर नजर आ रही है। अब सवाल यह है कि क्या तौल मशीनों की जांच होगी? क्या रिजेक्ट धान की खरीदी की जांच होगी? और क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही होगी? या फिर सुरेंद्र दाहिया जैसे लोग शासन को प्रतिवर्ष की तरह सुरेंद्र दाहिया जैसे लोग खरीदी किसानों ने जिला प्रशासन से तत्काल जांच, तौल सत्यापन और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है ।


मनोज सिंह परिहार ✍️ 

8225008012

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